नये साल का नया सवेरा

नये साल का नया सवेरा
लाया है उम्मीदें नयी,
कुछ ख्वाब नये दिखा रहा ये
कुछ हसरतें नयी जगा रहा ये,
कुछ सपने फिर से बुन रहा ये
आशायें कई है जगा रहा ये,
हौसलों को मेरे बढ़ावा देता
दबे कदमों से आ रहा।

हैं कुछ एहसास ताज़ा सा फ़िज़ा में
हवायें गुनगुना रही गीत नया,
उजली सी सुबह है देती
नयी उम्मीदों की ख्वाहिशें जगा,
है कहती…
कर लो ख्वाबों को अपने हक़ीक़त में तुम जवां,
चुन लो अपने लिए भी
एक नया आसमान।

चहचहाती ये चिड़िया गाती यही तराना,
उड़ चलो संग मेरे
पा लो अपना नभ प्यारा,
फूलों को भी आ गया है
अब मुझको खुश कर जाना,
कहते है…
मुस्कुराओं तुम भी निडर होकर हम जैसा,
कर लो फ़तेह हर डगर पे
गमों को करदो हवा।

नये साल का नया सवेरा
लाया है उम्मीदें नयी,
कुछ ख्वाब नये दिखा रहा ये
कुछ हसरतें नयी जगा रहा ये,
कुछ सपने फिर से बुन रहा ये
आशायें कई है जगा रहा ये,
हौसोलें को मेरे बढ़ावा देता
दबे कदमों से आ रहा।

©adittigaur

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *